बचपन में मुझे सिखाया गया..".सहनशीलता को अपनाकर ब्राह्मण कभी न जीता है, किसी लक्ष्य के लिए नहीं अपमान का हलाहल पीता है..".लेकिन परिपक्वता आने के साथ ही, न जाने कई बार अपने स्वार्थ के लिए मैंने इस सिद्धांत का गला घाेंटा होगा. मैंने गलत किया या सही मैं नहीं जानता, लेकिन मुझे लगता है की जो मैं करता आया हूँ यही
शायद आज के युग का "SIDDHANTH" है.
Showing posts with label Q outside Sreeleathers in CP(N. Delhi). Show all posts
Showing posts with label Q outside Sreeleathers in CP(N. Delhi). Show all posts